रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?

बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है,

प्यार के एक तार से सारा संसार बाँधा है I

साथियों हमारे देश में त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व होता  है साथ ही उनको मनाने के पीछे कुछ न कुछ इतिहास भी होता है I

आज हम बात करेंगे रिस्तो की पवित्रता और भाई बहन के प्यार के लिए मनायें जाने  वाले त्यौहार रक्षाबंधन” की जिसे “राखी का त्यौहार” भी कहा जाता है

साथियों रक्षाबंधन हर वर्ष  श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो की अगस्त के महीने में आता है I

साथियों रक्षाबंधन वैसे तो हिन्दू  त्यौहार माना जाता है , परन्तु इस त्यौहार की पवित्रता इतनी है की इस त्यौहार का सम्मान  सभी  धर्म के व्यक्ति करते है और करना भी चाहिए,  क्योंकि धर्मं अलग होने से भाई बहन का रिश्ता  अलग नहीं हो जाता है I ऐसी कई सच्ची कहानियां है जो यह बताती है की इस त्यौहार को कई बार दुसरे धर्मं के लोगो ने भी मनाया है और जरुरत पड़ने पर इसकी पवित्रता और बहन की रक्षा के दिए गए वचन को अपने प्राणों से बढकर निभाया है I 

इस त्यौहार में एक भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है और बहन अपने भाई की लम्बी उम्र और सफलता की कामना करती है i

इस त्यौहार को मनाने के पीछे वैसे तो कई कहानियां है जिसमें  से कुछ इस प्रकार है:

१.    माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी

कथा भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी है I भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर असुरों के राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा I दानवीर बलि इसके लिए सहज राजी हो गया I वामन ने पहले ही पग में धरती नाप ली तो बलि समझ गया कि ये वामन स्वयं भगवान विष्णु ही हैं I बलि ने विनय से भगवान विष्णु को प्रणाम किया और अगला पग रखने के लिए अपने शीश को प्रस्तुत किया I विष्णु भगवान बलि पर प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा I असुर राज बलि ने वरदान में उनसे अपने द्वार पर ही खड़े रहने का वर मांग लियाI इस प्रकार भगवान विष्णु अपने ही वरदान में फंस गए I तब माता लक्ष्मी ने नारद मुनि की सलाह पर असुर राज बलि को राखी बांधी और उपहार के रूप में भगवान विष्णु को मांग लिया

२.     द्रोपदी  और श्रीकृष्ण की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत में शिशुपाल के साथ युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जी की तर्जनी उंगली कट गई थी I  यह देखते ही द्रोपदी कृष्ण जी के पास दौड़कर पहुंची और अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी I इस दिन श्रावण पूर्णिमा थी I इसके बदले में कृष्ण जी ने चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी I

३.    राजा बलि और इंद्र देव की कथा


भविष्य पुराण के अनुसार सालों से असुरों के राजा बलि के साथ इंद्र देव का युद्ध चल रहा थाI इसका समाधान मांगने इंद्र की पत्नी सची विष्णु जी के पास गई, तब विष्णु जी ने उन्हें एक धागा अपने पति इंद्र की कलाई पर बांधने के लिए दिया I सची के ऐसा करते ही इंद्र देव सालों से चल रहे युद्ध को जीत गए I इसलिए ही पुराने समय में भी युद्ध में जाने से पहले राजा-सैनिकों की पत्नियां और बहने उन्हें रक्षा सूत्र बांधा करती थी, जिससे वो सकुशल जीत कर लौट आएं I

४.    रानी कर्णावती और हुमायूँ

यह कहानी उस समय की है जब राजपूतों को अपने  राज्य को बचाने के लिए मुस्लमान राजाओं से युद्ध करना पड़ रहा था I उस समय चित्तोड़  की रानी कर्णावती थी I रानी कर्णावती एक विधवा रानी थी I  उसी समय गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने  चित्तोड़ राज्य पर  हमला कर दिया I इस मुस्किल समय में रानी कर्णावती ने हुमायूँ को उंकी सहायता के लिए सन्देश भिजवाया सनेश्वाहक  के साथ रानी कर्णावती ने हुमायूँ के लिए राखी भी भेजी I राखी पाकर हुमायूँ ने भी रानी कर्णावती को अपनी बहन माना और  उनकी तथा उनके राज्य की रक्षा के अपनी सेना को चित्तोड़ भेजा जिससे घबराकर बहादुर साह को पीछे हटना पड़ा

५.    सम्राट एलेक्जेंडर और सम्राट पुरु

राखी त्यौहार की ये सबसे पुरानी कहानी मानी जाती है I उस समय जब एलेक्जेंडर  ने भारत जितने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ यहाँ आया था I उस समय भारत में सम्राट पुरु का काफी बोलबाला था I जहाँ एलेक्जेंडर ने कभी किसी से भी नहीं हारा था परन्तु एलेक्जेंडर की सेना पर  सम्राट पुरु की  सेना भारी  पड़ने लगी I जब एलेक्जेंडर की पत्नी को रक्षा बंधन के बारे में पता चला तब उन्होंने सम्राट पुरु के लिए एक राखी भेजी थी जिससे की वो एलेक्जेंडर को जान से न मार दें I वहीँ पुरु ने भी अपनी बहन का कहना माना और एलेक्जेंडर पर हमला नहीं किया था I

इसके साथ ही आप सभी को “रक्षाबंधन” के त्यौहार की बहुत-बहुत शुभकामनाएं