पंचतंत्र की कहानियाँ

बहुत समय पहले जंगल के सभी पक्षी एक सभा में एकत्र हुए अपना नया राजा चुनने के लिए I वे अपने वर्तमान राजा गरुड़ से संतुष्ट नहीं थे , क्योंकि  वह अपना अधिकांश समय स्वर्ग में ही बिताता था I पक्षियों के सुख – दुःख की उसे विशेष चिंता न थी I इसीलिए वे अपना नया राजा चुनने को एकत्र हुए थे I

                                                 बहस के बाद पक्षियों की सभा में इस बात पर सहमति बनी कि उनका राजा उल्लू होगा I सभी पक्षी अपने नए राजा की ताजपोशी करने की   तैयारियों में जुट I

तभी कहीं से एक कौआ उड़ता हुआ आया और पक्षियों के इस निर्णय पर अपना विरोध जताया I वह हँसते हुए बोला, “तुम्हें और कोई पक्षी नहीं मिला था राजा  बनाने को I बेकार –  सी सूरत…. दिन में अँधा रहना वाला उल्लू…. हुंह I वैसे भी उल्लू शिकारी पक्षी है I वह पक्षियों की सुरक्षा तो क्या करेगा बल्कि उन्हें मारकर खा जरुर जाएगा I क्या मोर या हंस तुम्हें इस योग्य नहीं लगे कि उन्हें राजा बनाया जाये ?”

             कौए  के इन विचारो ने पक्षियों को सोचने पर विवश कर दिया I तब यह निर्णय हुआ की राजा को चुनने के लिए एक अन्य सभा बुलाई जाएगी I ताजपोशी की तैयारियां भी थम गईं I

दिन का समय होने के कारण उल्लू कुछ भी देख पाने में असमर्थ था I वह तो इंतज़ार कर रहा था कि सभी पक्षियों की और से उसे बुलाने कौन आ रहा था I

पक्षियों का राजा चुना गया उल्लू अपनी ताजपोशी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था I तभी उसे अचानक आभास हुआ कि उसके आसपास कोई नहीं है, कोई बोल नहीं रहा, कोई हलचल नहीं I

   दिन का समय होने के कारण वह यूं भी कुछ देख पाने में असमर्थ था I

अब उसे बेसब्री के साथ थोड़ा संदेह भी होने लगा I अपने इसी संदेह तथा बेसब्री के चलते उसने अपने एक साथी से ताजपोशी में हो रहे अनावश्यक विलम्ब का कारण पुछा I

पहले तो उसका साथी कुछ न बोला I लेकिन उल्लू द्वारा बार-बार आग्रह करने पर उसका साथी बोला, “ताजपोशी समारोह स्थगित हो गया है I सभी पक्षियों ने नया राजा चुनने का निश्चय किया है I अब यहां कोई भी नहीं है I सभी अपने घरों को लौट चुके हैं I पक्षियों का राजा चुनने के लिए सभा फिर से बुलाई जाएगी I”

“ऐसा क्यों ?” गुस्से में भरे उल्लू ने पुछा I

“एक कौए ने सभा में आकर हमारी जाती के खिलाफ यह जहर उगला कि हम पक्षियों के रक्षक नहीं भक्षक हैं I”

“कहां है वह दुष्ट कौआ जिसने मुझे राजा बनने से वंचित कर दिया ?”

वह कौआ वही पास बैठा था I ‘होने वाला’ राजा उल्लू क्रोध की अधिकता से पागल – सा होता बोला, “तुमने मेरी ताजपोशी रुकवा दी, मुझे राजा नहीं बनने दिया I आज से हम जानी दुश्मन हैं I मेरी बात याद रखना I”

कहते हैं तभी से  कौओं और उल्लुओं की आपसी शत्रुता चली आ रही है I

सीख – इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें जबरन किसी के काम में दखल नहीं देना चाहिए अन्यथा हमें भी कोवों की तरह दुश्मनी मोल लेना पड़ेगी I