साथियों हम सभी ने जीवन में कभी न कभी अपमान का सामना किया होगा या अपमान सहा होगा, यदि आप भी अपमान के बदले की आग में जल रहे है तो आज आपको एक बहुत ही दिलचस्प कहानी बताने जा रहा हूँ, जो आपको बहुत मजा भी देगी साथ ही एक बहुत बड़ी सिख देगी जो आपकी या किसी की भी जिंदगी बदल सकती है, आईये शुरू करते है,

यह कहानी है आदि मानव के समय कि, एक जंगल में कई जानवर रहते थे उसी जंगल में एक भैंसा और घोड़ा भी रहते थे I एक दिन भैंसे और घोड़े में किसी बात पर लड़ाई हो गई , वह लड़ाई काफी देर तक चलती रही उस लड़ाई में भैंसा जीत गया और उसने घोड़े को मार भगाया I घोड़ा उस समय तो वहां से भाग खड़ा हुआ परन्तु वह बदले की आग में जलता रहा, वह कईं दिनों तक सोचता रहा कि भैंसे से बदला कैसे लिया जाये, तभी एक दिन उस घोड़े को एक आदिमानव दिखाई देता है, वह घोड़ा उससे दोस्ती करता है और उसे भैंसे से बदला लेने के लिए राज़ी कर लेता है I

                       घोड़ा उसे कहता है कि तुम एक डंडा लेकर मेरी पिट पर बैठ जाना I मैं दौड़ता रहूँगा और तुम मेरी पीठ पर बैठ कर भैंसे को मारना  ताकि मेरा बदला पूरा हो सके I आदि मानव राजी जो जाता है और उस घोड़े के कहे अनुसार उसकी पीठ पर बैठकर भैंसे को खूब दौड़ा – दौड़ाकर मारता है I इस प्रकार उस घोड़े का बदला पूरा होता है और वह बहुत खुश होता है I

मगर उस जीत की ख़ुशी मैं घोड़ा यह भूल जाता है कि बस, उसी दिन से आदिमानव घोड़े की सवारी करना सीख गया और तब से आज तक आदमी घोड़े कि सवारी कर रहा है I

साथियों इस कहानी में घोड़े ने अपना बदला तो ले लिया परन्तु उसने खुद को और उसकी आने वाली पूरी पीढ़ी को मनुष्य का गुलाम बना दिया I

इसी प्रकार जब – जब इतिहास के पन्नों में पृथ्वीराज चौहान का नाम लिखा जाता है  तब – तब उनके नाम के साथ एक नाम और जुड़ता है, वो नाम है जयचंद, जिसने अपना बदला लेने के लिए देश के दुश्मन से हाथ मिलाया और अपने आने वाली पीढ़ी को शर्मशार किया I

अब हम आपको बताते है की बदला किस प्रकार लेना चाहिए I

साथियों अगर बदला  लेना है तो थॉमस अल्वाएडिसनकी तरह लीजिये, जिसे स्कूल से यह कहकर निकल दिया गया था कि इसे हम नहीं पढ़ा सकते हैं I और उसने वो मुकाम हासिल कर दिखाया कि आज दुनिया में ऐसा स्कूल नहीं है जिसमें  थॉमसअल्वा एडिसन के बारे में नहीं पढ़ाया जाता हो I बल्ब बनाकर उसने पूरी दुनिया को रोशन कर दिया I   

बदला लेना है तो उस मूर्ख कालिदास की तरह लीजिये जिसने अपनी पत्नी की ठोकर खाकर मूर्ख कालिदास से महाकवि कालिदास बनकर लिया I

                  साथियों बदला लेना हि है तो JRD टाटा की तरह लीजिये, उन्हें मुंबई की वाटसन होटल में अंग्रेजो ने घुसने नहीं दिया था I उस होटल पर तख्ती लगी रहती थी “इंडियन एंड डॉग्स आर नोट अलाउड”, उस अपमान का बदला उन्होंने मुंबई में ताज होटल बनवाकर लिया और उस पर तख्ती लगवाई “अंग्रेज और अंग्रेजी बिल्लियाँ आर नोट अलाउड I” और पुरे हिंदुस्तान का सर गर्व से ऊँचा किया I

                           दोस्तों बदला लेना है तो दशरत मांझी की तरह लीजिये जिसने अपनी पत्नी की मौत का बदला छिनी हतौड़े से पहाड़ की छाती चिर कर आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाकर लिया I

                            यदि आप भी बदले की आग में जल रहे है तो आप भी उस आग को एक ऐसी दिशा दीजिये की वह आने वाली पीढ़ी के लिए वरदान साबित हो अभिशाप नहीं I

Pawan Mandloi

sochanahitha.com (A site for common man)