साथियों किसी ने क्या खूब कहा है की

दूध फटने पर वही लोग घबराते है , 

जिनको पनीर बनाना नहीं आता I 

कहते हैं की भगवान जब भी एक रास्ता बंद करता है तो एक दूसरा रास्ता भी जरुर खोलता है I  साथियों इसीलिए जब कभी हमारे सामने कोई चुनौती या विपरीत परिस्थिति आती है तो हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है और हमें कोई रास्ता दिखाई नहीं देता जबकि कई बार मुश्किल  से मुश्किल समस्या का हल भी बहुत आसान होता है Iजैसे पुरानी  कहावत है कि  सीधी उंगली से घी न निकले तो ऊँगली टेड़ी कर लेनी चाहिये मगर उँगली टेडी करने बजाय घी को गरम भी किया जा सकता है I

इसी प्रसंग पर  आज प्रस्तुत है मेरे द्वारा साधारण शब्दों में लिखी गई  कविता जिसका शीर्षक है

रास्ते और भी है

पंथ है पथरीला ,

कांटा है जहरीला,

ठोकरों का स्वाद चखकर,

पहाड़ों के सिने पर पांव रखकर

चल  दे राही  की

रास्ते और भी है I

टूटी हुई कश्ती है,

उजड़ी हुई बस्ती है,

थम न जाना अँधेरे मोड़ पर,

चलता जा रोशनी की चाह में

कि रास्ते और भी है I

माना जाना है व्योम के पार,

थककर बैठा है सारा संसार

चल दे मत बैठ हारकर,

कि रास्ते और भी है I

माना सागरों का पार नहीं है

हारना मगर तुझे स्वीकार नहीं है

 

तो साथियों जब भी आपको अपने Goal को पाने में कोई रुकावट लगे  तब याद  रखना की रास्ते और भी है I

An Article by

  Pawan Mandloi