साथियों किसी ने क्या खूब कहा है

“ताश के पत्तो से महल नहीं बनता 

नदी को रोकने से समंदर नहीं बनता 

आगे बढते रहो जिंदगी में हर पल 

क्योंकि एक जीत से कोई  सिकंदर  नहीं बनता ” 

साथियों इसी प्रकार हम कई बार जिंदगी में एक दो सफलता पाकर खुश हो जाते हैं और उन्ही सफलताओं से खुश होकर अपनी जिन्दगी में और आगे की मंजिलो को पाने के लिए प्रयास नहीं करते जबकि जिंदगी में हमें कभी रुकना नहीं चाहिए एक मंजिल पाने के बाद दूसरी मंजिल के लिए तैयारी शुरू कर देना चाहिए I  इसी पर प्रस्तुत है श्री बलबीर सिंहजी रंग द्वारा लिखी बहुत ही प्रेरणादायक कविता, जो हमें जीवन में हमेशा आगे बढने के लिए प्रेरित करती है:

उदय प्रभात हुआ  फिर भी तो

छाई  चारो ओर उदासी  I

ऊपर मेघ भरे बैठे

किन्तु  धरा प्यासी की प्यासी  i

आहत अंतर के पल भर की

राहत  को आराम न समझो

ओ विप्लव के थके साथियों

विजय मिली विश्राम न समझो i

पदलोलुपता और त्याग का

एकाकार  नहीं होने का

दो  नावों पर पग रखने से

सागर पर नहीं  होने  का

जब तक सुख के स्वप्न  अधूरे

तब तक पूरा कम न समझो

ओ विप्लव के थके साथियों

विजय मिली विश्राम न समझो i

 

(A Poem of बलबीर सिंह रंग)