“ये जिन्दगी की अदालत है”

साथियों नमस्कार मैं फिर एक बार हाजिर हूँ आपका दोस्त, आपका शुभचिंतक,

साथियों आपने खरगोश और कछुए की कहानी तो जरुर सुनी होगी जिसमें खरगोश रास्ते में सो जाता है और कछुआ लगातार चलते-चलते race जीत जाता है ,मगर में आज आपको बताने जा रहा हूँ की जिंदगी की race में कछुए भी आप ही है और खरगोश भी आप ही हैI

आप कछुए की चाल से चलते है  या खरगोश की तरह तेज दोड़ते हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता i

यदि आप खरगोश है और रास्ते में सो गए है तब भी  कोई बात नहीं ,जब नींद से जागो तब दोड़ना शुरू कर दीजिये ,क्योंकि जिंदगी की race में आपका मुकाबला कछुए से नहीं है ,आपका मुकाबला किसी और से भी नहीं है , वो मंजिल सिर्फ आपकी है और आपका मुकाबला भी सिर्फ आप से ही है I

अरे किसी और को तो पता भी नहीं की आपको जाना कहाँ है ,आपकी मंजिल क्या है I

न आपके आगे कोई है और न पीछे ,तो जब जिंदगी की race में आप अकेले है तो जीतेगा कौन ?

One and only  you  my Friends ,one and only  you

जिंदगी की race में जीत आपकी ही निश्चित है, जब जीत  निश्चित है तो डर किस बात का  बस निकल पड़ो  और दिखा दो दुनिया को की आप सिर्फ जितने के लिए बने है I

ये जिंदगी की अदालत है साहब यहाँ मुज़रिम भी आप ही है ,वकील भी आप ही  है ,जज भी आप है और फैसला भी आपका ही है I अब ये आप पैर निर्भर करता है कि, आप अपने साथ न्याय करते है या अन्याय I अपने नजरिये की जंजीरों में बंधकर पूरी जिन्दगी गुज़ारना चाहते या उन जंजीरों को तोड़कर आजाद परिंदों की तरह उड़ना चाहते है I

 

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By Pawan Mandloi