असली शांति (A story for life)

साथियों नमस्कार !

सदियों से ही हमारे देश में किस्से  और कहानियाँ सुनने , सुनाने की परम्परा रही है I

हम सभी बचपन से ही किस्से और कहानियाँ सुनते आये है,इन्हीं  में से कई कहानियाँ एसी होती है जो हमारे ह्रदय और जीवन पर गहरी छाप छोड़ती है  और हमारे जीवन की दिशा ही बदल देती है , तो आईये शुरू करते है एक ऐसी  ही कहानी जो हमें एक नयी सीख देती है :

 

बहुत पुरानी  बात है एक  राज्य में चित्रांश नामक राजा राज्य करता था I चित्रांश एक कला प्रेमी राजा थे और अक्सर अपने राज्य में कला प्रतियोगिताएँ  करवाते रहते थे I विशेषकर उन्हें चित्रकला से बहुत प्रेम था I

एक बार राजा ने  एक चित्रकला प्रतियोगिता रखी और घोषणा की कि जो भी कलाकार  (चित्रकार) उसे एक ऐसा चित्र बनाकर देगा जो शांति को दर्शाता हो, तो वह विजेता को मुंह मांगा इनाम देगा I यह बात पुरे राज्य में फेल गयी और दूर –दूर से कई नामी- गिरामी चित्रकार  एक से बढ़कर एक चित्र लेकर राजा के महल पहुंचे I हर किसी के मन में विजेता बनकर इनाम जितने की लालसा थी I

आखिरकार फेसले का दिन आ गया I

दरबार में चित्रों की प्रदर्शनी लगायी गयी राजा ने एक – एक करके सभी चित्रों को देखा सभी चित्र देखने के बाद राजा ने उनमें से दो चित्रों को अलग रखवा दिया I पहला चित्र  बहुत ही सुंदर शांत झील का था I उस झील का पानी इतना साफ़ और निर्मल था कि उसके अंदर की सतह तक दिखाई दे रही थी I उसके आस – पास हिमखंडो की छवि उस पर ऐसे उभर रही थी, मानो कोई दर्पण रखा हो I जो भी उस चित्र को देखता, उसको यही लगता कि शांति को दर्शाने के लिए इससे अच्छा कोई चित्र हो ही नहीं सकता I

वहीं दुसरे चित्र में पहाड़ थे, परंतु वे बिल्कुल सूखे, बेजान और वीरान थे I इन पहाड़ों के ऊपर घने गरजते बादल थे I घनघोर वर्षा होने से नदी उफान पर थी I पहाड़ी के एक ओर स्थित झरने ने रौद्र रूप धारण कर रखा था I जिन लोगों ने इस चित्र को देखा, उन्होंने यही सोचा था कि भला इसका ‘शांति” से क्या लेना – देना I सभी आश्वस्त थे कि पहले चित्र बनाने वाले चित्रकार को ही इनाम मिलेगा I तभी राजा ने  दूसरा चित्र बनाने वाले चित्रकार को विजेता घोषित किया और ऐलान किया कि  विजेता को  मुंह मांगा इनाम देंगे I यह सुनकर हर कोई आश्चर्य में था I

पहले चित्रकार से रहा नहीं गया, वह बोला,”लेकिन महाराज इस चित्र में ऐसा क्या है, जो आपने इसे पुरस्कार देने का फैसला लिया I तभी  राजा ने पहले चित्रकार को अपने साथ चलने के लिए कहा I दुसरे चित्र के समक्ष पहुंचकर राजा बोले, “झरने के बाई ओर हवा से एक ओर झुके इस वृक्ष को देखो I उसकी डाली पर बने उस घोंसले को देखो I देखो, कैसे एक चिड़िया इतनी कोमलता से, इतने शांत भाव और प्रेमपूर्वक अपने बच्चों को भोजन करा रही है I” फिर राजा ने समझाया, “शांत होने का अर्थ यह नहीं है कि आप ऐसे स्थिति में हों, जहां कोई शोर समस्या न हो और सब तरफ शान्ति का माहौल हो  I

शांत होने का सही अर्थ है कि आप हर तरह की अव्यवस्था , अशांति , अराजकता के बीच हों और तब भी आप शांत रहें, अपने काम पर केंद्रित रहें, अपने लक्ष्य की और अग्रसर रहें I”

 

  “असली शांति अंदर होती है , बाहर नहीं “

 

                                               धन्यवाद !