राजा और भिखारी

 

साथियों नमस्कार

“सोचा नहीं था डॉट कॉम” में आपका स्वागत हैं !

आईये शुरू करते हैं एक और मज़ेदार एवं प्रेरणादायक कहानी जो की हमें जीवन में एक नई सीख देगी

दोस्तों एक बार की बात है एक राज्य के राजा का जन्मदिन था I उसने उस दिन यह संकल्प लिया था की आज सुबह मुझे जो भी पहला व्यक्ति  मिलेगा मैं उसे खुश और संतुष्ट कर दूंगा I जब वह  राजमहल से निकला तो उसे पहले व्यक्ति  के रूप में एक भिखारी मिला I वह भिखारी उसका खोया हुआ ताम्बे का सिक्का जो की नाली में गिर  जाता है  उसे खोज रहा था I राजा उसे संतुष्ट करने के लिए एक चाँदी का सिक्का देता है I भिखारी चाँदी का सिक्का रखकर खुश तो होता है पर फिर उसी ताम्बे के सिक्के को खोजने में जुट  जाता है I राजा उसे देखकर सोचता है की  शायद यह चाँदी के सिक्के से संतुष्ट नहीं हुआ है और उसे बुलाकर एक सोने का सिक्का देता है I पर फिर वो भिखारी सिक्का रखकर उसी ताम्बे के सिक्के  को खोजने में जुट जाता है I यह देख राजा उसे एक और सोने का सिक्का देता है परन्तु  फिर वो भिखारी नाली में अपना सिक्का खोजने लग जाता है I इस बार राजा उसे बुलाकर कहता है की मैं अपना आधा  राज – पाट तुम्हे सौंपता हूँ Iभिखारी यह सब स्वीकार कर लेता है लेकिन फिर अपना सिक्का खोजने लग जाता है I इस बार राजा परेशान होकर उससे कहता है की मैं तुम्हे अपना पूरा साम्राज्य सौंपता हूँ I पर भिखारी यह सब स्वीकारने के बाद भी उसी सिक्के को ढ़ूँढ़ने लग जाता है I दोस्तों देखा आपने की कैसे उस भिखारी को एक पूरा साम्राज्य मिलने पर भी वो उसी ताम्बे के सिक्के को खोजता रहा I दोस्तों ठीक इसी प्रकार हमें  भी भगवान ने अरबों का मालिक बना के भेजा है और हम चिल्लरों के लिए मरते रहते हैं I क्यूंकि एक रिसर्च के मुताबिक हमारे आधे  शरीर की कुल कीमत 8 अरब है और बाकि आधे  की कीमत जानना अभी जारी है कम से कम बाकि आधे की कीमत दो गुनी भी माने तो हमारे कुल शरीर की कीमत 16 अरब हैं I हमे भगवान ने कुबेर के खजाने सहित भेजा है और हम छोटी – मोटी चिल्लरों के लिए मरते हैं जैसे की मुझे भगवान ने मुझे अच्छा रंग नहीं दिया , अच्छा कद नहीं दिया आदि I तो दोस्तों  ऐसी चिल्लरों के लिए न मरे क्यूंकि भगवान ने आपको  बहुत कुछ दिया है और बिना वजह दुखी न हो I

साथियों बड़े और सफल लोग भी जो खो जाता है उसको ढूढ़ने में अपना समय बर्बाद नहीं करते बल्कि जो खो गया है उससे भी ज्यादा हासिल करने में जुट जाते हैं I

जरा अपने जीवन और सोचने के तरीके के बारे में ध्यान दीजिये की आप भी  कहीं  उस भिखारी  की तरह  राजपाट मिलने के बाद भी उस खोये हुए ताम्बे के सिक्के को ढूढ़ने में अपना समय और काबिलियत को बर्बाद तो नहीं कर रहें हैं I

 

धन्यवाद !