साथियों आईये जाने की :

“क्या कारण है की, हम अपनी मंजिल पा न सके

हम क्या हैं, क्यों दुनिया को दिखा न सके I”

                                            

दोस्तों शुरू करते  है  एक और प्रेरणादायक कहानी जो सिकंदर  (एलेग्जेंडर) के जीवन के जीवन के किस्सो पर आधारित है I

 

सिकंदर के पिता का नाम  फिलिप था और वो मैसेडोनिया के राजा थे I एक बार की बात है उनके पास एक आदमी अच्छी नस्ल का घोड़ा  लेकर आया, जब  फिलिप ने उस घोड़े को देखा तो, वो घोड़ा उन्हें  बहुत पसंद आया I राजा फिलीप ने  उस आदमी से घोड़े की  कीमत पूछी, आदमी ने उसकी कीमत 30 टैलेंट बताई जो की बहुत ज्यादा थी घोड़ा खरीदने से पहले  उन्होंने कहा की उन्हें इसकी परीक्षा लेने दो I जब राजा ने अपने सिपाहियों से उस घोड़े की  सवारी करने को कहा, मगर उस घोड़े  को कोई भी काबू में नहीं कर पा रहा था,  छोटा सिकंदर यह सब देख रहा था I वह दौड़ता हुआ अपने पिताजी  के पास गया और उनसे कहा की मैं इस घोड़े को काबू में कर सकता हूँ I लेकिन उसके पिता फिलिप  ने कहा की बड़े लोग इसे काबू में नहीं कर पा रहे तुम कैसे करोगे ? सिकंदर ने कहा की मैं काबू में कर लूँगा बस आप मुझे एक मौका दे दीजिये और अगर मैं इसे काबू नहीं कर पाया तो मैं आपको इसके पैसे चुकाऊंगा I इसपर फिलिप ने कहा की मैं तुम्हे मौका देता हूँ लेकिन अगर तुम इसे काबू में नहीं कर पाए तो मैं तुमसे 60 टैलेंट लूँगा और मैं नहीं चाहता की मेरा बेटा इतनी सी उम्र में कर्जा ले I सिकंदर ने बिना विचलित हुए उन्हें हाँ कह दी और कुछ ही समय में उस घोड़े पे काबू पा लिया क्यूंकि सिकंदर समझ गया था की वो घोड़ा अपनी ही परछाई से डर रहा था इसीलिए उसने उसका मुंह उस तरफ घुमा दिया जहां से उसे अपनी परछाई न दिखाई दे और उसकी बेचैनी दूर करने के लिए उसकी पीठ थपथपाई और उसपे काबू पा लिया I फिर उसकी सवारी के लिए निकल गया यह देखते हुए उसके पिता ने कहा की “यह है मेरा बेटा “और साथ ही यह भी कहा कि “अपने लिए एक उपयुक्त राज्य ढूँढना, मैसेडोनिया तुम्हारे लिए बहुत छोटा है “I

तो दोस्तों देखा आपने किस तरह सिकंदर में बचपन से ही होंसला और खुद पर विश्वास था I इसी गुण ने सिकंदर को आगे चलकर पूरी दुनिया पर राज करने में मदद की I दोस्तों आपने देखा होगा की बहुत से लोग सही और काबिल होने पर भी सिर्फ अपने ऊपर भरोसा और होंसला  न होने के  कारण या तो दुसरो से प्रभावित हो जाते हैं या उनके हिसाब से चलने लगते है I

इसीलिए जो आपको सही लगे या सही महसूस हो वो करे दुसरे कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं  उससे विचलित न हों और ना ही डरे की अगर मैं ऐसा करूँगा तो क्या होगा बस जो आपको सही लगे वह करे  I खुद पर  विश्वास रखें  और जीवन में आगे बढते रहें I