साथियों नमस्कार  !

 

मैं फिर हाजिर हूँ एक नई कहानी के साथ जो हमें नई  सीख देती है , तो  आईए   शुरू करते है कहानी

दोस्तों, बहुत पुरानी  बात है, एक जंगल में गद्दु नाम का एक हाथी रहता था I वह शरीर से सबसे बड़ा और ताकतवर था जिसके  कारण उसका पुरे जंगल पर रोब था I कोई उसके सामने जाने की हिम्मत नहीं करता था,  जब भी वह भूखा होता, तो अपनी सूंड से पेड़ की टहनी तोड़ता और मजे से पत्ते खाता I जंगल के भेडियों को यह बात पसंद नहीं थी I एक दिन भेडियों ने इक्कटा होकर  उसको मारने की योजना बनाई , “उसका इतना बड़ा शरीर है, उसे मारकर उसका मांस हम काफी दिनों तक खा सकते हैं I पर एक बुड्ढे भेड़िए ने कहा “उसको मारना कोई बच्चों का खेल तो नहीं I” एक भेड़िए ने हिम्मत दिखाते हुए कहा, “मैं  उसे मार सकता हूँ I”

वह गद्दु हाथी के पास गया और उसे प्रणाम किया I हाथी ने पुछा, “तुम कौन हो ?” भेड़िया बोला, “महाराज ! मुझे जंगल के सारे जानवरों  ने आपके पास भेजा है I अपने जंगल में कोई राजा नहीं है I हम सब ने मिलकर सोचा कि आप जैसे बलवान को ही जंगल का राजा बनाना चाहिए I” यह सुनकर गद्दु हाथी खुश हो गया और उसके साथ चल पड़ा I भेड़िए ने रास्ते में कहा, “ मुहुर्त का समय नजदीक आ रहा है , जरा जल्दी चलना होगा हमें I” भेड़िया तेजी से भागने लगा I बीच में एक तालाब आया I उस तालाब में  ऊपर – ऊपर , तो पानी दिखता था, लेकिन निचे दलदल था I भेड़िया छोटा होने के कारण कूद कर तालाब को पार कर गया, लेकिन गद्दु हाथी अपना भारी शरीर लेकर दलदल में फंसता चला गया I निकल न पाने के कारण वह भेड़िए को आवाज लगाने लगा, “अरे ! दोस्त, मेरी मदद करो !” भेड़िए का जवाब तो अलग ही आया, “अरे मूर्ख ! मुझ जैसे भेड़िए पर तुमने यकीन किया I अब भुगतो और अपनी मोत का इंतज़ार करो इस दलदल में ” इसीलिए कहा गया है कि तुरंत किसी पर यकीन नहीं करना चाहिए I

तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि  हमें एकदम से बिना सोचे समझे या किसी लालच में आकर किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए अन्यथा हमारा हाल भी गद्दु हाथी की तरह होगा  I