क्यों नहीं मिलती लय मुझे ?

 

क्यों नहीं मिलती लय मुझे,

क्यों नहीं बनती मुझसे कविता !

क्यों नहीं आती कल-कल आवाज़ झरनों की,

क्यों  सुखी पड़ी है सविता

क्या कहीं अकाल आया है,

या प्रकृति ने हमें दंड सुनाया है

जंगल के जंगल उजड़ गए

दिखाए नहीं देता कोई शेर और चिता

क्यों नहीं मिलती लय मुझे …………

क्यों  नहीं बनती मुझसे कविता !

क्या शब्दकोष ख़त्म हो गया है,

या मेरे अंदर का कवि सो गया है,

या फिर पत्थरों के साथ रह कर

कवि दिल भी पत्थर हो गया है

राम कैद हो गए रामायण में,

कोई नहीं पढ़ता कुरान और गीता

क्यों नहीं मिलती लय मुझे…………..

 

A poem by

Pawan Mandloi