साहसी पायलट (Pilot)

 

                    

दोस्तों हममें से बहुत से लोग सही सलामत होते हुए भी जीवन से हार मान लेते है, और अपना जीवन एक कमज़ोर, गरीब और असफल व्यक्ति के रूप में गुजार देते है जो की अपने जीवन के साथ अन्याय है !

दोस्तों हमें जीवन में अपने आप को कभी कमज़ोर नहीं समझना चाहिए, चाहे विपत्ति कितनी ही बड़ी क्यों न हो ! हम देश – दुनिया में ऐसे कई लोगो के बारे में सुनते है, जिन्होंने जीवन में कई मुसीबते आने के बावजूद हार नहीं मानी और अपने बुलंद हौसलों एवं मेहनत के बल से कई कीर्तिमान स्थापित किये

दोस्तों आज मेँ एक ऐसे साहसी पायलट की कहानी बताने जा रहा हु जिसने विपरीत परिस्थियों मेँ भी हार नहीं मानी और अपने मजबूत इरादों का लोहा मनवाया :

यह कहानी लन्दन के एक पायलट की है जिनका नाम डगलस बॉर्डर था, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके दोनों पैर कट गए थे ! किन्तु उसके इरादे इतने मजबूत थे की उसे लगता ही नहीं था की उसके दोनों पैर नहीं है ! उसे यह महसूस होता था की वह उड़ रहा है! एक्सीडेंट से पहले वह वायु सेना (Air force) मेँ था और उसका अटल निश्चय था की वह वायुसेना मेँ ही रहेगा ! उसकी पत्नी ने उसे समझाया की अपने देश के लिए तुमने काफी कुछ कर लिया है, किन्तु उसका उत्तर था की युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और वायुसेना का जवान होने के नाते मै खाली नहीं बैठ सकता !

अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद उसने  प्रैक्टिस जारी  रखी और एक दिन अपने कमांडर से कहा की अब मेँ आसानी से वायुयान (Aeroplane)  उड़ा सकता हूँ ! कमांडर भी डगलस की काबिलियत जानता था, परन्तु कमांडर ने अपनी विवशता बताते हुए कहा मेँ मानता हूँ की तुम विमान उड़ा सकते हो, किन्तु मुझे खेद है की वायुसेना के नियमानुसार तुम्हे फिर से वायुसेना मेँ नहीं रखा जा सकता ! पायलेट बोला आम लोगो के लिए जो परीक्षाएं निर्धारित है, मेरी उनसे भी अधिक कठिन परीक्षा लिजिए ! यदि मै उनमे सफल हो जाता हूँ तो आपको मुझे रोकने का कोई अधिकार नहीं है !

डगलस अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से उन परीक्षाओ मै तो सफल हुए ही साथ मै युद्ध के दौरान जर्मनी में 151 विमान मार गिराए ! वह तीन बार दुशमनो की जेल से निकल भागने मै सफल हुआ !

अंततः जब विजयदिवस मनाया गया तो विमान में बैठकर उसने परेड का नेतृत्व किया ! सभी लंदनवासी उसके सम्मान के लिए मौजूद थे !

दृढ़ संकल्प और फौलादी इरादे प्रतिकुलताओ को अनुकूलताओं मै बदल देते है ! इसलिए विपरीत परिस्थितियों मै भी मन को मजबूत रखे!