दोस्तों आज में  कवि नीरज की एक बहुत ही प्रेरणा दायक कविता post कर रहा हूँ, जिसे पढ़ कर कोई भी  आदमी अपने जीवन के कड़वे अनुभवों को भुलाकर, अपने जीवन  को नयी शुरुआत दे सकता है !

यह कविता हमें सिखाती है की जिस तरह से कुछ खिलौने के खो जाने से हमारा बचपन समाप्त नहीं होता, उसी तरह जीवन में कुछ बुरा या असफल हो जाने से हमारा जीवन समाप्त नहीं होता और न ही जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते बंद होते है!

दोस्तों जीवन में होने वाली छोटी – मोटी घटनाओ से हमें विचलित नहीं होना चाहिए ! जैसे कुछ दीपो के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता, जिस तरह कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता, उसी तरह जीवन में होनी वाली छोटी – छोटी घटनाओ और असफलताओ से घबराकर हमें कोशिश करना बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें अपने जीवन पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए और जीवन की उचाईयों को छूना चाहिए, तो दोस्तों प्रस्तुत है महान कवि नीरज की वह कविता जिसका एक – एक शब्द जीवन जीने को उत्साहित करता है और बताता है की जीवन में कुछ भी खोता नहीं है !

नीरज का एक गीत

छिप – छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो

कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता !

सपना क्या है? नयन सेज पर,

सोया हुआ आंख का पानी !

और टूटना है उसका ज्यो,

जागे कच्ची नींद जवानी !

गीली उमर बनाने वालो, डुबे बिना नहाने  वालो

कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता !

माला बिखर गई तो क्या,

खुद ही हल हो गई समस्या

आंसू गर निलाम हुए तो,

समझो पूरी हुई तपस्या !

रूठे दिवस मनाने वालो, फटी कमीज सिलाने वालो !

कुछ दीपो के बुझ जाने से, आंगन नहीं मरा करता !

खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,

केवल जिल्द बदलती पोथी !

जैसे रात उतार चांदनी

पहने सुबह धुप की धोती  !

वस्त्र बदल कर आने वालो, चाल बदल कर जाने वालो,

चन्द खिलौनों के खो जाने से, बचपन नहीं मरा करता !

लाखो बार गगरियां फूटी,

शिकन न आयी पर, पनघट पर !

लाखो बार किश्तियां डूबी,

चहल – पहल वो ही है तट पर !

तम की उमर बढ़ाने वालो, लौ की आयु घटाने वालो

लाख करे पतझर कोशिश, पर उपवन नहीं मरा करता !

                                                            नीरज